गांधी स्मारक प्राकृतिक चिकित्सा समिति द्वारा एक दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा जागरूकता अभियान सम्पन्न

दिनांक 19 जनवरी 2026
स्थान:- गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, राजनगर-प्, पालम गाँव, नई दिल्ली-110077

गाँधी स्मारक प्राकृतिक चिकित्सा समिति, राजघाट, नई दिल्ली-110002 के तत्वावधान में दिनांक 19 जनवरी 2026 को गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सैकेण्डरी स्कूल, राजनगर-प्, पालम गाँव, नई दिल्ली-110077 में एक दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला के माध्यम से जागरूकता का अभियान किया गया। यह अभियान स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में एक सराहनीय पहल सिद्ध हुआ।

कार्यशाला में समिति की ओर से को-ऑर्डिनेटर श्रीमती निशा करगेती तथा प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग की मर्मज्ञ श्रीमती नीरू सेठी ने अपने सारगर्भित एवं प्रेरणादायक विचारों से उपस्थित अध्यापकों एवं विद्यार्थियों को भाव-विभोर कर दिया। वक्ताओं ने सरल एवं प्रभावशाली भाषा में प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने छात्रों को प्राकृतिक चिकित्सा के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह चिकित्सा पद्धति शरीर को प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती है। प्राकृतिक चिकित्सा का शाब्दिक अर्थ “प्रकृति के माध्यम से उपचार” है, जिसमें दवाइयों के स्थान पर जल, मिट्टी, सूर्य, वायु एवं संतुलित आहार जैसे प्राकृतिक तत्वों का प्रयोग किया जाता है, जिससे शरीर में स्वयं रोगों से लड़ने की क्षमता विकसित होती है।

आधुनिक समय में बढ़ते तनाव, मोटापा एवं जीवनशैली जनित रोगों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा बिना किसी दुष्प्रभाव के शरीर और मन को संतुलित करती है तथा रोगों को जड़ से समाप्त करने में सहायक है। इसके अंतर्गत पंचतत्वों-पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि एवं आकाश-के माध्यम से शारीरिक उपचार किया जाता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर के अंगों की कार्यक्षमता में सुधार होता है।

कार्यशाला में यह भी बताया गया कि रोगों की उत्पत्ति असंतुलित जीवनशैली के कारण होती है और प्राकृतिक तत्वों द्वारा उपचार करने से शरीर स्वयं को शुद्ध कर धीरे-धीरे रोगमुक्त हो जाता है। पंचतत्वों का संतुलन शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ एवं सशक्त बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्राण शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह जीवन की मूल ऊर्जा है, जो श्वास-प्रश्वास के माध्यम से शरीर में प्रवाहित होती है। प्राण शक्ति के संतुलन से मानसिक शांति, ऊर्जा और एकाग्रता में वृद्धि होती है।

छात्रों को पढ़ाई एवं परीक्षाओं में एकाग्रता बढ़ाने के लिए सरल योगाभ्यास, ध्यान-साधना एवं प्राणायाम के व्यावहारिक टिप्स भी दिए गए। इसके साथ ही किशोरांे की लंबाई बढ़ाने हेतु ’’ताड़ासन’’ का अभ्यास करवाया गया, जो रीढ़ की हड्डी को मजबूत एवं शरीर को संतुलित रखने में सहायक है।

कार्यक्रम में ’ऊँ’ की ध्वनि के महत्व को भी समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ‘ऊँ’ ब्रह्मांड की मूल ध्वनि है, जिसके नियमित उच्चारण से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और मानसिक एकाग्रता में वृद्धि होती है। छात्रों को ‘ऊँ’ जप का सामूहिक अभ्यास भी कराया गया।

यह कार्यशाला गाँधी स्मारक प्राकृतिक चिकित्सा समिति के अध्यक्ष डॉ. ए.के. अरुण एवं सचिव श्री सच्चिदानन्द जी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की सफलता में विद्यालय के ’’प्रधानाचार्य महोदय’’ का स्नेहपूर्ण सहयोग एवं विद्यालय परिवार की समस्त टीम का विशेष योगदान रहा। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का यह अभियान अत्यंत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ और विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।